Sunday, April 23, 2017

आज मेरे यार की शादी है..!

अमीर से होती हैं, गरीब से होती हैं
दूर से होती हैं, क़रीब से होती हैं
मगर जहाँ भी होती हैं, ऐ मेरे दोस्त
शादियाँ तो नसीब से होती हैं

आज मेरे यार की शादी है
यार की शादी है, मेरे दिलदार की शादी है
लगता है जैसे सारे संसार की शादी है
आज मेरे यार की शादी है...

वक़्त है खूबसूरत, बड़ा शुभ लगन मुहूरत
देखो क्या खूब सजी है, दुल्हे की भोली सूरत
ख़ुशी से झूमे है मन, मिला सजनी को साजन
कैसे संजोग मिले हैं, चोली से बँध गया दामन
एक मासूम कली से मेरे गुलज़ार की शादी है
आज मेरे यार की शादी है...

ओ सुन मरे दिल जानी, तेरी भी ये जवानी
शुरु अब होने लगी है, नयी तेरी जिंदगानी
ख़ुशी से क्यों इतराए, आज तू हमें नचाये
वक़्त वो आने वाला, दुल्हनिया तुझे नचाये
किसी के सपनों के सोलह-सिंगार की शादी है
आज मेरे यार की शादी है...

सारे तारे तोड़ लाऊँ, तेरे सेहरे को सजाऊँ
फूल राहों में बिछाऊँ मैं प्यार के
आज लूँगा मै बलाएं, दूँगा दिल से दुआएं
डाल गले में ये बाँहें अब यार के
एक चमन से देखो आज बहार की शादी है

आज मेरे यार की शादी है...!

Saturday, April 22, 2017

शर्मनाक! लोकतंत्र में नंगे होने के बाद किसानों ने पिया मूत्र, PM मोदी अब भी नहीं मिले तो खाएंगे मल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 38 दिनों से प्रदर्शन कर रहे तमिलनाडु के किसान सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। लेकिन फ़िलहाल सरकार ने इनकी ओर ध्यान की ज़रूरत नहीं समझी है।
इसलिए हर रोज़ अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आज पिशाब पी पिया। कर्ज़ माफी की गुहार के साथ यूँ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर खुद को बुरी तरह से नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
इतना ही नहीं, किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया तो हम लोग कल को मल खाने पर भी मजबूर हो जाएंगे।
बता दें कि पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे ये तमिलनाडु किसान सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए काफी कुछ कर चुके हैं।
इससे पहले वह मरे हुए जानवर और घास भी खा चुके हैं। पीएम मोदी से मुलाकात न होने पर कुछ किसानों ने सड़क में निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन भी किया था।

Tuesday, April 18, 2017

23 औरतों के बलात्कार की वो चीखें, जो भारत को कभी सोने नहीं देंगी..

क्या कुनन-पाशपोरा आपको याद है?

By ऋभाष
February 24, 2017

23 और 24 फरवरी 1991 की रात को कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के कुनन और पाशपोरा दो गांवों में, 23 औरतों के बलात्कार हुए. कुछ लोग इस संख्या को 40 भी बताते हैं. इसका आरोप भारतीय सेना पर लगा. 26 साल बीत चुके हैं, पर इस घटना के दोषी पकड़े नहीं गए. बहुत सालों तक तो इस घटना को स्वीकार ही नहीं किया गया कि ऐसा कुछ हुआ भी है. 24 साल बाद इन औरतों में से 5 ने अपनी बातें बताईं और ये बातें एक किताब के रूप में बाहर आईं. ये किताब उस ओर की घटना है, जिसकी तरफ से सारा देश आंख मूंदे रहता है. हमें ये लगता है कि सेना का ही वर्जन सही है. पाकिस्तान और आतंकवादियों से लड़ाई में कौन असली विक्टिम है, उसे जानना हमारे लिए जरूरी नहीं होता. मैं अक्सर ऐसा सोचता हूं, कि अगर हम वहां होते, तो क्या करते. क्या सोचते. किससे नाराज होते. किसको मारना चाहते. क्या सोचते देश के बारे में.

2015 में ये किताब “Sexual Violence and Impunity in South Asia” प्रोजेक्ट के तहत जुबान पब्लिकेशन की सीरीज में आई थी. ये उस सीरीज की पहली किताब थी. पांच युवा लेखिकाओं एस्सार बतूल, इफरा बट, समरीना मुश्ताक, मुनाजा राशिद और नताशा राथर ने इस किताब को लिखा. सरकारों के खिलाफ आवाज उठाती ये किताब है. ये वो लोग हैं जिनकी आवाज पर 2013 में इस केस को फिर खोला गया था. इन लड़कियों की हिम्मत काबिले तारीफ है. निर्भया बलात्कार कांड के बाद इन लोगों की हिम्मत और बढ़ी. क्योंकि ये बात औरतों की है. जिनके लिए कोई भी दरिंदा बन जाता है.

किताब के मुताबिक 23 और 24 फरवरी 1991 की रात को चौथी राजपूताना राइफल्स के सिपाही कुनन-पाशपोरा गए थे. ये लाइन ऑफ कंट्रोल के पास है. ये कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन था. मतलब खाली कराकर आतंकियों की खोज करना.

इस किताब का एक अंश आपको पढ़ा रहे हैं-

तुरंत ही एक सिपाही हमारे सामने आ गया. मैं उसकी शराब को सूंघ सकती थी. उसके हाथ में बोतल थी. मेरा गला सूख गया था. मैं चिल्ला भी नहीं पा रही थी. मैं खड़ी भी नहीं हो पा रही थी. मेरे पैर जमीन में सट गए थे. फातिमा और अमीना ने मुझे दोनों तरफ से पकड़ रखा था. उनकी उंगलियां मेरी बांहों में धंस गई थीं.

तभी मैंने देखा कि सिपाही एक से बढ़कर छह हो गए. मैं चिल्लाना चाहती थी. पर मेरे दादाजी भी कुछ नहीं बोल पा रहे थे. मुझे नहीं पता कि वो मेरी अम्मी को कहां ले गए थे. मुझे बस मेरा गिड़गिड़ाना याद है. ख़ुदा के लिए हमें छोड़ दो, हमने कुछ नहीं किया. मैंने उनके जूतों पर सिर रख दिया. पर वो मुझे किचन में घसीट ले गया. मेरी मां वहीं पर थी. मैंने पूरी ताकत से आवाज दी – “अम्मी, बचा लो”. पर मैं कह नहीं सकती कि मैंने उसे किस हालत में देखा और उसके साथ क्या हो रहा था. मेरा पैरहन फाड़ दिया गया. और उसी के साथ मेरी पूरी जिंदगी भी.

जब मुझे होश आया तो मेरा सिर खाली हो चुका था. मैं सुन्न हो गई थी. मेरा चेहरा भीग गया था. मैं नंगी थी, मेरा शरीर ही नहीं, मेरी आत्मा भी नंगी हो चुकी थी. मेरी मां उसी कमरे में मेरे साथ थी. वो शायद होश खो बैठी थी या फिर जान-बूझ के नहीं देख रही थी. उसने अपना चेहरा मेरी तरफ से घुमा लिया था. तभी मैंने किसी को रोते हुए सुना. वो मेरा भाई था. उसने किसी चीज से मुझे ढंक दिया. मुझे साफ-साफ याद नहीं है कि ये क्या था. मैंने आज तक उससे पूछा नहीं है. उस रात के बारे में हमने कभी बात नहीं की है. पर मुझे याद है कि उसके बाद मैं अपने शरीर के नीचे वाले हिस्से को महसूस नहीं कर सकती थी.

वो एक रात मेरी जिंदगी बन गई. मैं कुछ भी कर लूं, कहीं चली जाऊं, कुछ भी सोच लूं वो रात मेरा पीछा नहीं छोड़ती. ये मेरे साथ हर वक्त रहती है. चाहे मैं नमाज पढ़ूं, खाना बनाऊं, या खुद को खूब साफ करूं. मैं सिपाहियों को बद्दुआएं देती हूं. हर वक्त. पूरी जिंदगी देती रहूंगी. लोग मुझे धीरज बंधाते हैं. कहते हैं कि तुम्हें सब भूल जाना चाहिए और जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए. पर वो कहना आसान है. करना नहीं. बहुत मुश्किल है. जैसे कि कोई अपनी आंखें खो दे और लोग भरोसा दिलाएं कि तुम्हारे पास आंखें थी ही नहीं.

मैंने पुलिस को कोई स्टेटमेंट नहीं दिया. मेरे परिवार को डर था कि कोई मुझसे शादी नहीं करेगा. पर मैंने कभी शादी नहीं की. ऐसा नहीं है कि मैं करना नहीं चाहती, मेरी हेल्थ मुझे अनुमति नहीं देती. मैं शादी करने लायक नहीं हूं. मैं किसी की जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहती. इसके अलावा जब मैं ये देखती हूं कि मेरे गांव की लड़कियों को उनके ससुराल वाले कैसे लेते हैं, तो मेरा और मन नहीं करता. हम लोगों ने मेरी दोस्त अमीना के रेप के बारे में कभी नहीं बोला. उसके बाद मैं जब भी उससे मिली, हम लोग खूब रोए. हम अभी भी दोस्त हैं, पर हमारे बीच एक अनकहा नियम है. उस रात के बारे में बात नहीं करनी है. मैं कुनन-पाशपोरा की रेप सर्वाइवर हूं. मैं सांस ले रही हूं, पर जिंदा नहीं हूं.”
ये घटना उस वक्त हुई थी जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर पहुंचा था. पर हमने इन चीजों को सिर्फ एक नजर से देखा था. वहां नजर आने वाला हर इंसान हमें आतंकी नजर आ रहा था. हम अपनी गलतियां देख ही नहीं पा रहे थे. भरोसा जीतने के लिए अपने इरादों को साबित करना पड़ता है. हम वो नहीं कर रहे थे. हम ताकत के दम पर सब सही करना चाहते थे. शायद हम अपनी कमजोरियों को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. इसलिए डरा रहे थे. इसका नतीजा भोगा उन लोगों ने, जिनका इसमें कोई रोल नहीं था. हम इसको मानने के लिए भी तैयार नहीं थे. हम कभी ये नहीं सोच पाए कि अगर हम वहां होते तो क्या करते. अगर समझना ही है तो इस किताब को एक बार जरूर पढ़ा जाना चाहिए. नहीं तो हम सिर्फ गोलियों की गूंज सुनकर ही किसी को सही डिक्लेयर करते रहेंगे. यही वजह है कि सैनिकों के कश्मीर में विशेष अधिकारों पर जरूर बात होनी चाहिए. वही अधिकार जिनके खिलाफ मणिपुर में इरोम शर्मिला लड़ाई लड़ती रही हैं. ध्यान से देखें तो देश में असली लड़ाई औरतों की ही है. हर राज्य में. प्रूफ चाहिए तो हर राज्य के अखबार पढ़ लेने की जरूरत है. एक दिन का ही. इसके सबूत हमें यूएन की तरफ से गई पीसकीपिंग फोर्सेज के कामों में भी मिलते हैं. कई देशों में सैनिकों द्वारा रेप किए जाने के आरोप लगे थे. यूएन के पूर्व चीफ कोफी अन्नान ने इस बात पर कई देशों को फटकार लगाई थी.

सच छुपेगा नहीं.!!

Monday, April 17, 2017

हैदराबाद: ‘जय श्री राम’ नहीं कहने पर मुस्लिम लड़कों को पीटा, इलाके में तनाव

हैदराबाद के चिक्कडपल्ली इलाके की सूर्यनगर कॉलोनी में बाइक पर जा रहे युवकों को गुंडों ने जबरन रोककर जय श्री राम कहने के लिए कहा।लेकिन जब उन्होंने ऐसा कहने से इनकार किया तो बदमाशों ने मुस्लिम युवकों पर हमला कर दिया जिसमें 5 युवक घायल हो गए। इस घटना के बाद सूर्यनगर इलाके में तनाव पैदा हो गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक मेहतरवाडी इलाके के कुछ बदमाश नशे में थे जिन्होंने इधर से गुजर रहे मुस्लिम लड़कों को रोका और उन्हें जय श्री राम नारा लगाने के लिए कहा।

वहीँ, जब इन लड़कों ने ऐसा करने से मना किया तो बदमाश हिंसा पर उतर आए। उन्होंने ऑटो रिक्शा और कार पर पथराव भी किया।हालाँकि इस मामले में चिक्कडपल्ली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर किया है और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया हैं। घायल मुस्लिम युवाओं मोहम्मद फ़ैज़ान, सैयद सोहेल, सैयद बशीर, आमिर और फ़िरदौस को इलाज के लिए गांधी अस्पताल ले जाया गया

जिस अजान से सोनू को तकलीफ है ,वही अजान की आवाज प्रियंका के दिल

बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम ने अजान को लेकर किए ट्वीट के बाद विवादों में आ गए हैं. सोनू ने 17 अप्रैल की सुबह ट्वीट किए जिनमें अज़ान को लेकर हो रहे शोर को लेकर शिकायत की गई है.
हालांकि, बॉलीवुड प्रियंका चोपड़ा का दिल एक बार भोपाल की अजान ने जीत लिया था. भोपाल की मस्जिदों से शाम के वक्त आने वाली अजान की आवाज प्रियंका के दिल में बस गई हैं.
दरअसल, प्रियंका चोपड़ा गंगाजल-2 फिल्म की शूटिंग के लिए भोपाल आई थीं. वह यहां करीब 20 दिनों तक रही और लौटते वक्त उन्होंने शाम-ए-भोपाल का जिक्र किया था. प्रियंका ने कहा था कि वह रोजाना शूटिंग खत्म करने के बाद सुहानी शाम में होटल की छत पर पहुंच जाती थी. यहां उन्हें हर दिशा से अजान की आवाज सुनाई पड़ती थी.
प्रियंका ने कहा था, ”होटल के आसपास छह मस्जिदें थी. ढलती शाम में अजान के लिए उठने वाली आवाज से उन्हें दिली सुकून मिलता था.’
पहली बार शूटिंग के सिलसिले में भोपाल पहुंची प्रियंका यहां की खूबसूरती की कायल हो गई थी. प्रियंका का कहना था कि वो भोपाल आई तो थी प्रियंका चोपड़ा बनकर लेकिन लौट रही है प्रियंका भोपाली बनकर.

अज़ान ले कर आज सुबह सवेरे सोनु निगम ने जो कहा उस पर बवाल मचना तय है

मुंबई | बॉलीवुड के मशहूर सिंगर, सोनू निगम ने सोमवार को एक के बाद एक कई ट्वीट कर, एक नयी बहस को जन्म दे दिया. सोनू निगम ने मस्जिद में सुबह सुबह होने वाली अजान पर सवाल उठाते हुए कहा की मुझे मुस्लिम नही होने के बावजूद जल्दी क्यों उठाया जाता है. हालाँकि उन्होंने मंदिर और गुरूद्वारे पर भी सवाल उठाये है. दरअसल ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर सुबह सुबह , लाउड स्पीकर के जरिये अजान, पूजा और अरदास करने का रिवाज रहा है.
इन्ही चीजो पर सवाल उठाते हुए सोनू निगम ने कहा की हम कब तक ऐसी धार्मिक रीतियों को जबरदस्ती ढोते रहेंगे. सोमवार सुबह सुबह उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट किये. जिसके बाद उनके ट्विटर हैंडल पर काफी लोगो ने जवाब दिया. उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा ,’ भगवान् सभी को आशीर्वाद दे, मैं मुस्लिम नही हूँ इसके बाद भी मुझे सुबह सुबह अजान की आवाज से उठना पड़ता है.’

सोनू निगम ने इसी ट्वीट में यह भी लिखा की आखिर देश में ये धार्मिक रीतिया कब खत्म होंगी. इस ट्वीट से जहाँ कई लोग उनके समर्थन में खड़े हो गए तो कई लोगो ने इसे बेहद घटिया करार दिया. एक यूजर के ट्वीट के जवाब में उन्होंने लिखा की जब मोहम्मद ने इस्लाम की स्थापना की थी, जब बिजली नहीं थी. फिर एडिसन के आविष्कार के बाद ऐसे चोंचलों की क्या जरूरत है.
सोनू निगम ने मंदिर और गुरुद्वारों में सुबह सुबह होने लाउड स्पीकर के जरिये होने वाली पुछा अर्चना पर भी सवाल उठाये. उन्होंने इसे गुंडागर्दी बताते हुए कहा की वह मंदिर या गुरुद्वारे के भी इस कदम को सपोर्ट नहीं करते कि बिजली का प्रयोग करके वे सुबह-सुबह किसी की नींद खराब करें. उनके ऐसे ट्वीट के बाद ट्वीटर पर #sonunigam और #ajan ट्रेंड करने लगे.

www. Koridih No1. com

सऊदी अरब ने क़तर की नाकेबंदी खत्म की,मसला सुलझाने की उम्मीद जगी।

रियाद-सऊदी अरब ने एक बड़ा एलान किया है जिसके बाद क़तर और अरब देशो के बीच विवाद सुलझता दिख रहा है,इससे पहले सऊदी अरब ने हवाई एरिया का इस्तेम...